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Meet Ragen Chastain the heaviest woman to ever complete a marathon



एक बार फिर,

पानी में नारंगी टोपियों की

दसवीं लहर बनेगी। 35 से 39 की

महिलाएँ और सभी एथीना।

दस, नौ, आठ, सात, छह…

मुझे बड़े लक्ष्य चुनना पसंद हैं

जिनमें मैं असफल हो सकूँ।

इसी से लक्ष्य दिलचस्प बनता है,

कि यह मुमकिन है

कि मैं इसे नहीं कर सकती।

यह भी मुमकिन है

कि मैं सफल हो सकती हूँ।

सन् 2017 में, रेगन चैस्टेन

मैराथन पूरी करने वाली

अब तक की सबसे भारी महिला बनीं।

अभी वह अपने सीज़न के

अंत में हो रही

एक आयरनमैन ट्रायथलन में

मुक़ाबला करने की

तैयारी कर रही हैं।

एक एथलीट के तौर पर,

मैंने कभी देखा नहीं था

कि मेरे लिए कैसा होगा कि मैं…

कुछ ऐसा करूँ

जिसमें मैं माहिर नहीं।

जब मैं हारूँगी और

किसी चीज़ में माहिर बनने का

मौक़ा नहीं मिलेगा

तो कैसा महसूस होगा

मेरे मन में यह सवाल उठने लगा

कि क्या मैं ऐसा कर सकती हूँ?

जब मैंने यह सवाल पूछा

तो मेरा वजूद

इसका जवाब जानना चाहता था।

ज़्यादातर लोग कहेंगे,

चलो पाँच किलोमीटर दौड़ से

शुरू करके देखें, अगर पसंद आए

तो शायद

साढ़े दस किलोमीटर दौड़ेंगे।

मैं सीधे मैराथन दौड़ने गई।

सैन डिएगो स्प्रिंग स्प्रिंट

ट्रायथलन कोज़ मुक़ाबला सुबह 5:45

मैं स्प्रिंग स्प्रिंट दौड़ने के

लिए सैन डिएगो आई हूँ।

यह मेरे सीज़न की

सबसे छोटी दौड़ है।

यह मेरे सीज़न की पहली रेस है।

और इसका मक़सद बस सहज होना,

चीज़ों की शुरुआत करना है।

आप आसपास घूमकर

देखना चाहेंगे कि तैरने के,

साइकिल ले जाने,

साइकिल लाने और दौड़ने

वग़ैरह के बड़े बैनर कहाँ हैं।

वे सब उत्तर में…

ट्रायथलन बहुत

असुविधाजनक मुक़ाबला है।

तो, जैसे, साइकिल चलाना

आसान नहीं होता

जब आप समुद्र से बिल्कुल

भीगे कपड़ों में निकलते हैं

पर आपको बहुत देर लगेगी

अगर आप कपड़े

बदलने की कोशिश करेंगे।

रेत से भरे पैरों के साथ

पैडल चलाना आसान नहीं है,

पर अगर बीच में न रुकें

तो आपकी रफ़्तार ज़्यादा तेज़ होगी।

तो यह एक दिलचस्प संतुलन है

कि मैं कितनी

असहज होना चाहती हूँ,

या मैं कितनी

तेज़ होना चाहती हूँ।

मेरे पिता पशु पालते थे

और मेरी परवरिश

पशु पालन करते हुए हुई।

बचपन में मैं थोड़ी मोटी थी,

पर मुझमें

शारीरिक आत्मविश्वास था

और मैं एक एथलीट थी।

मैंने फ़ुटबॉल खेला।

मैंने वॉलीबॉल खेला।

मैं एक चीयरलीडर

और चीयरलीडिंग कप्तान थी।

मैंने मंच पर

हर तरह का प्रदर्शन दिया

और मशहूर हुई।

और मुझे हमेशा से नाचना पसंद था।

पर शायद चूँकि मैं एक एथलीट थी,

मेरे मोटापे का

कम मज़ाक उड़ाया गया।

मेरी यह पक्की सोच बन गई थी

कि पतला शरीर

बेहतर शरीर होता है,

ज़्यादा स्वस्थ शरीर होता है, जो

शरीर मैं हासिल करना चाहती थी।

मैंने पतला होने की

पूरी कोशिश की

क्योंकि मुझे यक़ीन था

कि उससे मैं बेहतर बनूँगी।

शारीरिक और मानसिक, दोनों लिहाज़

से यह बहुत अस्वस्थ बात थी।

पर मेरे स्वस्थ आहार-नियम की

सबसे ज़्यादा प्रशंसा

तब हुई जब मैं अपने

खाने के विकार के

सबसे बुरे दौर में थी।

दस, नौ, आठ…

एक बार फिर, पानी में

दस नारंगी टोपियों की

लहर होगी। 35 से 39 की

महिलाएँ और सभी एथीना।

किनारे पर 11वीं लहर…

-ठीक लग रहा है?

-हाँ। और आपको?

-घबरा रही हूँ।

-हाँ।

मैं ढाई सालों से

दौड़ी नहीं हूँ…

-हाँ।

-…आधी रिटायरमेंट जैसा है।

मैं बहुत ही धीमी हूँ।

मैं सबसे आख़िर में होती हूँ

और यह बात मानती हूँ।

परवाह नहीं कि लोग मेरे आकार या

समय के बारे में क्या सोचते हैं।

मैं दौड़ में हूँ। रेस के

नियमों के मुताबिक़ हूँ।

यह मेरा एक लक्ष्य है

और मैं इसे हासिल करूँगी।

मतलब, मैं वहाँ मौजूद हूँ।

और मैं ऐसा करना चाहती हूँ

और इसलिए ऐसा कर रही हूँ।

और जैसे… मेरा सिद्धांत है,

मोटे होकर जाओ

और छोड़कर मत आओ।

तीन, दो, एक, चलो!

इन खेलों में

मोटे लोगों को हमेशा

सहज नहीं लगता और सभी उन्हें

हमेशा स्वीकार भी नहीं करते।

तो नज़र में आना

मेरे लिए बहुत अहम है

और अगर मैं किसी चीज़ में

शामिल होती हूँ

तो मैं उसमें

योगदान दिए बिना नहीं रह सकती।

-शाबाश।

-शुक्रिया, आपको भी शाबाश।

तैरने में मुश्किल हुई।

पर मैंने कर लिया।

एक तिहाई हिस्सा

मुश्किल से किया।

अब साइकिल की बारी।

-शाबाश, लड़की।

-शुक्रिया, आपको भी शाबाश।

कॉलेज में, मैंने बहुत

सामजिक न्याय का काम किया था।

हाई स्कूल में भी मैंने बहुत

नस्लवाद-विरोधी काम किया था।

मैं बहुत सा समलैंगिक

और पार-लैंगिक काम किया।

पर मैंने कभी मोटे लोगों को

ऐसा समूह नहीं माना था

जिनका उत्पीड़न होता है।

और फिर जब मैं

30 साल की हुई तो मुझमें

बदलाव आया और मैंने हर आकार में

स्वास्थ्य को पाया।

और उसने असल में मुझे

मोटापे का कार्यकर्ता बना दिया।

पहले, मुझे सिर्फ़

एक मोटी बॉलरूम डांसर के तौर पर

अपने अनुभव ब्लॉग पर डालने थे।

और फिर मैं सामान्य तौर पर

बस सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य

और हर आकार पर

ज़्यादा ब्लॉग करने लगी।

उस ब्लॉग की वजह से, मुझे

बोलने के निमंत्रण मिलने लगे।

कैलिफ़ॉर्निया यूनिवर्सिटी

सैन डिएगो

एटकिंसन हॉल

-हैलो।

-हाइ।

जाते हुए मेरे गले लगो।

-तुमसे मिलकर ख़ुशी हुई।

-मुझे भी।

-तुम्हारे बाल प्यारे हैं।

-शुक्रिया।

यह मेरा बड़ा सौभाग्य है

कि आज यहाँ रेगन चैस्टेन का

स्वागत कर रही हूँ।

यह दरअसल मेरी…

सबसे पसंदीदा

मोटापे की कार्यकर्ता हीरो हैं।

हरेक आकार पर स्वास्थ्य और

आकार स्वीकृति जानने और वज़न

और स्वास्थ्य का सच जानकर

मेरी सोच वाक़ई बेहतर हो गई।

हरेक आकार पर स्वास्थ्य

यह समझाना चाहता है

कि स्वास्थ्य

एक दायित्व नहीं है,

योग्यता का पैमाना नहीं है

जो हमारे पूरे नियंत्रण में हो

या किन्हीं भी हालात में

जिनकी गारंटी हो,

हरेक तक उन चीज़ों की

पहुँच हो जो उन्हें

अपने स्वास्थ्य की

प्राथमिकता के लिए चाहिए,

और वे उस तक पहुँचने के लिए

जो रास्ता चुनते हैं।

हरेक आकार पर स्वास्थ्य

शरीर के आकार पर ध्यान न देकर

हर चीज़ को देखते हुए

असली स्वास्थ्य पर

ध्यान देता है।

आकार को स्वीकार करना

बहस का मुद्दा नहीं,

आप या तो आकार को स्वीकारते हैं

या आप ग़लत हैं।

सिर्फ़ वही दो विकल्प हैं।

आकार को स्वीकार करना

एक बड़ा आंदोलन है

जो यह सुनिश्चित करने पर

ध्यान देता है कि मोटे लोग को

वही अनुभव, मौक़े

और पहुँच मिले

जो पतले लोगों को मिलते हैं।

और इसमें ज़िंदगी के

कई पहलू शामिल हैं।

फ़ैशन उनमें से एक है।

एयरलाइन्स। ऐसे अस्पताल

और चिकित्सा केंद्र हैं

जिनके बिस्तर

हमें छोटे पड़ते हैं।

पहुँच और समानता का

यह बड़ा मुद्दा है

जिसे वाक़ई हल करने की ज़रूरत है।

हर किसी को अपनाया जाना चाहिए।

मेरा ऐसा व्यक्तित्व है

जो नज़रों में आने वाले

मोटे, ख़ुद से प्यार करने वाले

और अपने लक्ष्य को

हासिल करने वाले

इंसान होने के नाते

अपने साथ होने वाले

बुरे बर्ताव का सामना कर लेता है

मुझे 2012 से रोज़ाना

अपमानजनक संदेश भेजे गए हैं।

कोई दिन ख़ाली नहीं गया।

मुझे जो सबसे पहला

अपमानजनक संदेश मिला था

वह एक ईमेल थी जिसमें लिखा था,

“मोटी और मोटी होगी।”

मेरा व्यक्तित्व ऐसा है

जो उससे कभी नहीं रुकेगा।

तो, अब मुझे सिर्फ़

तीन मील चलना है

फिर मेरा काम ख़त्म

और मैं जाकर पैनकैक्स खा सकूँगी।

दौड़

मोटापे के कार्यकर्ता के तौर पर,

नज़रों में रहना एक बड़ी बात है।

तो मेरा सिद्धांत है

समाप्ति रेखा को पार करो,

मैडल जीतो।

-तुम कर लोगी, दोस्त।

-तुम भी।

हाँ। चलो ताली दो। चलो भी।

धूम मचा दो।

मेरे लिए यह हमेशा

मुश्किल होता है क्योंकि मुझे

पीछे रहना पसंद नहीं है।

वह बनो जिसे मुबारकक़बाद मिले।

-तुम कर लोगी!

-सबने कमाल कर दिया।

सच कहूँ, तो यह मुश्किल है।

किसी वजह से दौड़ की शुरुआत से ही

मेरी कमर बहुत अकड़ी हुई है…

और हर क़दम पर

बहुत दर्द हो रहा है, तो…

मैं इसे ख़त्म करने को बेताब हूँ।

आज का दिन बहुत मुश्किल रहा।

मुझे हर महीने

10,000 ईमेल आती हैं।

उनमें लिखा होता है

कि मैंने तुम में ख़ुद को देखा।

मैंने तुम्हारी बात सुनी

और उसे महसूस किया,

और मैंने उसे अनुभव किया,

और मैं इकलौती नहीं हूँ,

और मैं अकेली नहीं हूँ।

यही बड़ी वजह है

कि यह क्यों और किसलिए

अहम है कि एथलेटिक्स में

और बाक़ी चीज़ों में मोटे लोग

नज़र में आएँ।

पतले शरीरों की नुमाइश देखने का

इंतज़ार करने के बजाय

मैंने अपने मोटे शरीर को

बाहर ले जाने और उसे

आज़माने का फ़ैसला किया

और पता चला

यह बहुत मस्त,

मज़ेदार चीज़ें कर सकता है।

समाप्ति रेखा पार कर ली,

मैडल मिल गया।

मैंने कर लिया और पीछे नहीं हटी।

यह मेरे बारे में है।

ख़ुद को दिमाग़ी तौर पर

दौड़ में बनाए रखा।

वह दिमाग़ी चुनौती ली

और उसमें सफल हुई,

मैडल के यही मायने हैं।

इसका मतलब मैं सफल हुई।

मैंने कर दिखाया।

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